News Ticker

देश के युवा प्रतिष्ठित कलाकार तिलक गोस्वामी के गायन ने जयपुर को किया भक्तिमय

प्रतापनगर स्थित सुरभि सदन ऑडिटोरियम में आयोजित “भक्ति कीर्तन संध्या” में कल शाम गूंजे हवेली संगीत और शास्त्रीय सुरों के अनुपम रंग

जयपुर।देश के युवा प्रतिष्ठित कलाकार तिलक गोस्वामी के भावपूर्ण गायन ने कल शाम जयपुर के संगीत प्रेमियों को भक्ति और शास्त्रीय संगीत के अद्भुत संसार में मंत्रमुग्ध कर दिया। गुलाबी नगरी के प्रतिष्ठित सुरभि सदन ऑडिटोरियम में आयोजित “भक्ति कीर्तन संध्या एवं म्यूज़िकल कॉन्सर्ट” में शहर के कला, संस्कृति और संगीत प्रेमियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।


तिलक गोस्वामी श्री वल्लभाचार्य जी की परंपरा के गौरवशाली वंशज हैं तथा पुष्टिमार्गीय हवेली संगीत के सुप्रसिद्ध साधक माने जाते हैं। उनके कीर्तन पारंपरिक ध्रुपद-धमार शैली और भारतीय शास्त्रीय ख़याल गायन का अनूठा संगम प्रस्तुत करते हैं। उनकी प्रस्तुतियों में नित्य लीलास्थ गोस्वामी श्री मुकुंद्रायजी महाराज की रचनाओं की विशेष झलक दिखाई दी, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति रस से सराबोर कर दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण एवं गणेश वंदना से हुआ, जिसके पश्चात “भक्ति कीर्तन संध्या” के अंतर्गत प्रस्तुत पदक्रम ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम में प्रस्तुत प्रमुख रचनाओं में —

  • “मन रे माधव सो” — सूरदास रचना, राग यमन, ताल तीनताल
  • “धि धि तम” — राग यमन आधारित ध्रुपद प्रस्तुति
  • “बाजे बधाइयाँ” — राग देश में कृष्ण जन्म का पद
  • “मधुकर श्याम हमारे चोर” — पंडित भीमसेन जोशी जी की प्रसिद्ध रचना
  • “ऐ मेरे नंद नंदन के प्यारे” — राग मांड आधारित भावपूर्ण प्रस्तुति विशेष रूप से सराही गईं।

हवेली संगीत की गंभीरता, शास्त्रीय संगीत की मधुरता और भक्ति रस की दिव्यता से सराबोर इस संध्या में उपस्थित श्रोताओं ने तालियों और भावपूर्ण सहभागिता के साथ कलाकार का उत्साहवर्धन किया। पूरा सभागार देर शाम तक भक्तिमय वातावरण में डूबा नजर आया।
इस प्रकार के सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक आयोजन भारतीय संगीत परंपरा और भक्ति संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम हैं। कार्यक्रम ने जयपुर की सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा प्रदान करते हुए संगीत प्रेमियों के मन में अमिट छाप छोड़ी। इस कार्यक्रम में जयपुर के सुप्रसिद्ध कलाकारों —


प्रवीण आर्य ने पखावज,
महेंद्र डांगी ने तबले,
गिरिराज बालोदिया ने हारमोनियम तथा


मनोहर टाक ने सारंगी पर अपनी उत्कृष्ट संगत से प्रस्तुति को सुरमयी ऊंचाइयों तक पहुँचाया और पूरे वातावरण को भक्तिरस एवं मधुर संगीत से सराबोर कर दिया।

Advertisements
scpl's avatar
About scpl (2 Articles)
Our goal is to deliver the most accurate information possible based on the needs of the majority of website owners and developers, and Ananova reports deliver the most reliable indicators of web host performance. - http://www.ananova.com

Leave a comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.